The Reader In Hindi Instant

एक दिन मैंने पूछा, "हाना, तुम कभी खुद क्यों नहीं पढ़ती?"

तब बारिश शुरू हुई। तेज, सर्द, पत्थर जैसी बूँदें। मैं एक बहुमंजिला इमारत के सीढ़ीदार दरवाजे के नीचे दुबक गया। अंदर गीली गंध थी, पुराने कपड़ों और मटमैली दीवारों की। तभी मैंने उसे देखा। वह सीढ़ियों से ऊपर उतर रही थी, हाथ में एक कोयला की बाल्टी लिए।

उसने मुझे राहत के बजाय चिड़चिड़ी नज़रों से देखा। वह बत्तीस-छत्तीस की थी, भारी-भरकम शरीर वाली नहीं, बल्कि सुडौल और साफ़-सुथरी। उसका चेहरा जानवरों जैसा था – कोमल और खतरनाक दोनों। उसने कहा, "बीमार लड़के को घूमना नहीं चाहिए।" The Reader In Hindi

अगले दिन मैं अपने पिता की शेल्फ से 'एमिलीया गालोटी' चुरा लाया। वह बैठी, मेज़ पर हाथ रखे, मेरी तरफ देखती रही। मैंने पढ़ना शुरू किया। आवाज़ें, संवाद, नाटक। वह सिर्फ सुनती थी। एक बार मैंने रुककर देखा – उसकी आँखों में पानी था। लेकिन उसने कभी किताब की तरफ नहीं देखा। कभी उँगली नहीं फिराई।

लेकिन वह दिन बहुत दूर था। उस गर्मी में, मैं सिर्फ उसकी आवाज़ में डूबा एक लड़का था, जो हर शब्द को उसके लिए प्रेम में बदल देता था। यह अंश बर्नहार्ड श्लिंक के उपन्यास के मुख्य विषयों – पीढ़ीगत अपराधबोध, निरक्षरता का कलंक, और असंभव प्रेम – को हिंदी में ढालता है। माइकल बर्ग की नज़र से, हाना सिर्फ एक प्रेमिका नहीं, बल्कि जर्मन इतिहास का एक दर्दनाक प्रतीक बन जाती है। एक दिन मैंने पूछा

उसका चेहरा पत्थर जैसा हो गया। उसने कहा, "मेरे लिए पढ़ना बंद करो। अब जाओ।"

मैं उसे 'हाना' कहता था। वह ट्राम में टिकट पंच करती थी। हर शाम मैं उसके पास जाता, नहाता, और फिर पढ़ता – 'ओडिसी', 'वॉर एंड पीस', 'द लेडी विद द डॉग'। वह एक साधारण अनपढ़ महिला लगती थी, लेकिन जब मैं पढ़ता, तो वह एक रानी बन जाती थी। वह हर पात्र के दर्द को अपने शरीर में समेट लेती थी। मेज़ पर हाथ रखे

"जो भी लाओ। कोई किताब।"

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